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गरà¥à¤®à¥€ का नाम लेते ही ह सामने वो चिलचलाती तपती गरà¥à¤®à¥€ का हमें अनà¥à¤à¤µ होने लगता है .हमारे देश में छः पà¥à¤°à¤•ार की ऋतà¥à¤à¤ होती है .जो à¤à¤• के बाद à¤à¤• आती है .उनके नाम इस पà¥à¤°à¤•ार है ,वसंत ,गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤µà¤°à¥à¤·à¤¾ ,शरद ,हेमंत ,शिशिर ,इनमे से जो गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤® ऋतू होती है .जो वसंत ऋतू के समापà¥à¤¤ होने पर आती है .गà¥à¤°à¥€à¤·à¥à¤® ऋतू , शीत ऋतू के आरमà¥à¤ होने पर समापà¥à¤¤ होती है .दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ और उतà¥à¤¤à¤°à¥€ गोलारà¥à¤§ à¤à¤• दूसरे की विपरीत दें होते है .जिसकी वजह से अगर à¤à¤• गोलारà¥à¤§ में गरà¥à¤®à¥€ होती है दूसरे गोलारà¥à¤§ में सरà¥à¤¦à¥€ होती है .जीवन में à¤à¤• तरह की वजह से नीरसता आ जाती है .जिस पà¥à¤°à¤•ार अगर हम à¤à¤• ही पà¥à¤°à¤•ार का कारà¥à¤¯ या à¤à¥‹à¤œà¤¨ हम रोज लगातार करे तो उससे हम ऊब जाते है .जीवन में सी आ जाती है .जिस पà¥à¤°à¤•ार à¤à¥‹à¤œà¤¨ में हमेशा नठ– नठसà¥à¤µà¤¾à¤¦ को चखने का जो मज़ा है .वैसे ही हमारे देश की ऋतà¥à¤“ में à¤à¥€ सरà¥à¤¦à¥€ के बाद जो गरà¥à¤®à¥€ आती है .उसका à¤à¥€ मज़ा कà¥à¤› और ही है .यानी जीवन में परिवरà¥à¤¤à¤¨ का à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है .
गरà¥à¤®à¥€ का मौसम
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हम सà¤à¥€ जानहै .की पृथà¥à¤µà¥€ हमेशा घूमती रहती है . जब पृथà¥à¤µà¥€ घूमकर सूरज की तरफ à¤à¥à¤•ती है .उस समय गरà¥à¤®à¥€ का मौसम आता है .जब गोलारà¥à¤§ सूरà¥à¤¯ की तरफ होता है .तब गरà¥à¤®à¥€ आती है .और जब गोलारà¥à¤§ सूरज से दूर होता है .तो सरà¥à¤¦à¥€ आती है .गरà¥à¤®à¥€ का मौसम जà¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤Ÿ और आषाॠके महीना में आता है .सूरà¥à¤¯ की गरà¥à¤®à¥€ इतनी तेज होती है .की इसको सहन करना बोहोत मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है .सà¥à¤¬à¤¹ से ही इतनी तेज गरà¥à¤®à¥€ लगती है .की इसे कà¤à¥€ – कà¤à¥€ सहन करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता है .जोलोग आमिर या धनवान होते है .वकà¥à¤Ÿà¥‹ aअपन घरो में ठ.सी.लगाकर आराम से रह लेते है .जो परिवार माधà¥à¤¯à¤® वरà¥à¤—ीय होते है .वो कूलर और पंखा लगाकर गरà¥à¤®à¥€ को कम कर ै .परनà¥à¤¤à¥ आप उनका सोचो जो गरीब होते.वो तो इस गरà¥à¤®à¥€ से बचने के लिठकिसी à¤à¥€ पेड़ की छाेखकर उसकी छावं में आसरा लेते है .
गरà¥à¤®à¥€ दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ गोलारà¥à¤§ में दिसंबर ,जनवरी ,फरवरी ,में गरà¥à¤®à¥€ आती है .लेकिन उतà¥à¤¤à¤°à¥€ गोलारà¥à¤§ में जून ,जà¥à¤²à¤¾à¤ˆ ,अगसà¥à¤¤ ,के महीनो में गरà¥à¤®à¥€ आती है .परनà¥à¤¤à¥ इस गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में अगर किसी को ख़à¥à¤¶à¥€ मिलती है तो वो है बचà¥à¤šà¥‡ ,और खà¥à¤¶ हो à¤à¥€ तो कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ नहीं सà¥à¤•ूलों की ढेरो सी छà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾ जो मि है .जबकि बड़े इस गरà¥à¤®à¥€ को सहन नहीं कर सकते तो बचà¥à¤šà¥‡ कहा से सहन कर सकते है .इसलिठहमारे देश में गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में बचà¥à¤šà¥‹ सà¥à¤•ूलों से काफी छà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾ मिलती है .जो की उनके लिठतो बोहोत ही मजेदार दिन होते है .
गरà¥à¤®à¥€ के मौसम से पलायन
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गरà¥à¤®à¥€ के मौसम से पलायन मतलब लोग इस चिलमिलाती गरà¥à¤®à¥€ से बचने के लिठअपने घरो छोड़कर पहाड़ी इलाके और ठंडी जगहों पर जाना पसंद करते है .और बचà¥à¤šà¥‹ की छà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ रहती है .तो अधिकतर लोग ठनà¥à¤¡à¥‡ इलाको में जाकर उनका मज़ा लेते है .गरà¥à¤®à¥€ में बार – बार नहाने का मन करता है .पानी पिने का मन करता हैं.पर लू इतनी तेज होती है की घर से बहार निकलने का मन नहीं करता है .इसलिठठनà¥à¤¡à¥‡ हिल सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ में इन सबका मजा लेते है .और गरà¥à¤®à¥€ को à¤à¥à¤²à¤¾ देते है .और वैसे à¤à¥€ इतनी गरमि में गà¥à¤œà¤°à¤¾ करना मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है .इसलिठकह सकते है .की लोग ठनà¥à¤¡à¥‡ इलाको की और गरà¥à¤®à¥€ को à¤à¤—ाने लिठपलायन करता है .
वातावरण से गरà¥à¤®à¥€ बड़ने का ———————————————–
हमारे दादा परदादा जी बताते है की पहले इतनी गरà¥à¤®à¥€ नहीं पड़ती थी .आज की जैसी सà¥à¤¥à¤¤à¤¿ है .वैसी पह थी .और इसका कारन कà¥à¤› वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤¨ बताते है .की वायॠपà¥à¤°à¤¦à¥‚षण करके मनà¥à¤·à¥à¤¯ ने इतना नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चाया है .की धरती का ‘ इको – सिसà¥à¤Ÿà¤® ‘ को ही हिला कर रख दिया है .जिससे गरà¥à¤®à¥€ बड़ रही है .वैजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¿à¤• तो ये à¤à¥€ ये कह रहे है .अगर यही हाल रहा तो 2050 तक मà¥à¤‚बई और समà¥à¤¦à¥à¤° किनारे बसे शहर à¤à¥€ समà¥à¤¦à¥à¤° में ही डूब जायेगे .
धरती का वातावरण गरà¥à¤® हो रहा है .जिससे धरती के धà¥à¤°à¥à¤µà¥‹ में जो बड़े – बड़े बरà¥à¤« के पहाड़ है वो पिघल रहा है .और उसका पानी पिघल जायेगी और à¤à¤• दिन पूरी धरती जल में डूब जाà¤à¤‚गी इसलिठसमय रहते हम इंसान कà¥à¤› नहीं तो हमारे यहां के पà¥à¤°à¤¦à¥‚षित परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ से अपनी धरती को बचा सकते है .जिससे à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में हमे इस à¤à¤¾à¤°à¥€ नà¥à¤•सान को देखना ना पड़े
गरà¥à¤®à¥€ से बचाव ,हरियाली ना मिटाओ
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इसका तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ अगर हमे गरà¥à¤®à¥€ से बचना है .तो हर जगह पेड़ – पौधे लगाठइसकी अनà¥à¤§à¤¾à¤§à¥à¤•ाटना रोके पहले तो हर ियान हरे à¤à¤°à¥‡ ही रहते थे .हर जगह हरियाली ही हरियाली दिखती थी .मतलव अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाना मà¥à¤¶à¥à¤•िल होता था .कितने खेत है .परनà¥à¤¤à¥ आज हम खड़े होकर आराम सेता सकते है .की कहा कितने पेड़ है .इसलिठहरियाली का अंत हम इंसानो का अंत है .इसके लिठकटाई और बरà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥€ पर रोक लगाà¤
कà¥à¤•ी पेड़ पौधे नहीं तो हवा नहीं ,हवा नहीं तो बदल नहीं बादल नहीं तो ,बारिश नहीं ,बारिश नहीं तो गरà¥à¤®à¥€ गरà¥à¤®à¥€ ,जो à¤à¥€ हो गरà¥à¤®à¥€ बà¥à¤¨à¥‡ का कारण तो हम इंसान ही है .हम अपने साथ -, साथ इस पृथà¥à¤µà¥€ पर रहने वाले जिव जंतॠको à¤à¥€ नà¥à¤•सान पोहचा रहे है .हम इंसान को à¤à¤—वानॠने जो बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ दी है .उसका हमे सदà¥à¤ªà¤¯à¥‹à¤— करना चाहिठऊपर वाले की रची इस धरती का हमे शà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ अदा करना चाहिठना की धरती को खराब करना चाहिठ.हम इंसान अपनी बà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ का गलत इसà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤² करके नà¥à¤•सान पोहचा रहे है .इसलिठऊपर वाले की रची इस पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ धरती की हरियाली को हमे बचाना है ना की मिटाना है .
गरà¥à¤®à¥€ के मौसम के लाà¤
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माना गरà¥à¤®à¥€ के मोसम में बोहोत नà¥à¤•सान होता है .बोहोत गरà¥à¤®à¥€ लगती है .परनà¥à¤¤à¥ उस पृथà¥à¤µà¥€ के रचयता ने हर परिसà¥à¤¥à¤¤à¤¿ में कà¥à¤› नस कà¥à¤› लाठà¤à¥€ दिया है .इस मौसम में विषैले कीटाणॠनषà¥à¤Ÿ हो जाते है .इस मौसम में सबका पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¤¾ फल आम लीची आदि अनेक रसीले फल आते है .जिसको खाने की लालसा सà¤à¥€ के मन में हमेशा ही रहती है .
इन फलो का सà¥à¤µà¤¾à¤¦ निराला होता है .इन गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में जगह – जगह ,शरबत ,लसà¥à¤¸à¥€ ,गनà¥à¤¨à¥‡ का रस ,नारियल पानी ,ठंडा पानी ,आसानी से सड़को पर मिल जाता है .गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में ठंडी कà¥à¤²à¥à¤«à¥€ और आइसकà¥à¤°à¥€à¤® खाना कोन पसंद नहीं करता इसलिठहर मौसम में कà¥à¤› ना कà¥à¤› खाश होता है .जो हम इंसानो के लिठबोहोत ही लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है .
गरà¥à¤®à¥€ से बचाव
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गरà¥à¤®à¥€ से हम अपने आप को इस पà¥à¤°à¤•ार बचा सकते है .
(1)पानी से à¤à¤°à¤ªà¥‚र चीजों का सेवन करे .
(2),गरà¥à¤®à¥€ पैदा करने वाले फूडà¥à¤¸ से बचे .
(3)सही समय पर खाये .
(4) नारियल तेल से करे बचाव .
(5) हॉट डà¥à¤°à¤¿à¤‚क को कहे ना .
(6)तेज à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ ना करे .
(7),खूब पानी पिठ.
(8)डारà¥à¤• रंग के कपडे ना पहने .
(9),समर पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ करे .
(10)हरि मिरà¥à¤š का सेवन करे .
उपसंहार
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हर मौसम की अपनी – अपनी विशेषता होती है .जहॉ ये गरà¥à¤®à¥€ का मौसम हमारे लिठअसहनीय होता है .उसे गरीब वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ वरदान समà¤à¤¤à¤¾ है .वो किसी à¤à¥€ पेड़ के निचे आराम से सो जाता है .वह वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ ठंडी और आरामदायक जगहों की सेर पर चला जाता है .इस पà¥à¤°à¤•ार गरà¥à¤®à¥€ अमीरो और गरीब दोनों के लिठमहतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है .किसान à¤à¥€ इसे कम महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ नहीं मानता है .इस पà¥à¤°à¤•ार हम कह सकते है .की गरà¥à¤®à¥€ के मौसम का अपना ही अलग मज़ा है .और आकरà¥à¤·à¤• है .इसमें कोई संदेह नहीं है .
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